अश्लीलता फैलाने के कैसे-कैसे तरीके
रमेश पाण्डेय
समाज कितना गिर जायेगा, इस बात की कल्पना नहीं की जा सकती। जिस भारत देश में कभी गांव की बहन-बेटी को अपनी बहन-बेटी मानकर लोग रस्मअदायगी किया करते थे, अब वहीं मिजाज पूरी तरह से बदल गया है। अगर इसका विरोध किया जाये तो लोग कहते हैं कि जमाना आधुनिक हो रहा है। जिधर देखिये उधर अश्लीलता का ही साम्राज्य फैलता नजर आ रहा है। टेलीविजन खोलिये तो अश्लीलता का संसार, रेडियो आन करिये तो उसमें भी वही बात। कपडे की दुकान पर जाइये, बाजार जाइये, सच कहूं आपको शरम आ जाएगी। और तो और आपके घर में आसपास का परिवेश भी उसी तरह से आधुनिक बन चुका है, जहां अश्लीलता फैलाना ही मुख्य फैशन समझा जा रहा है। अगर मेरी बात सच लगे तो स्कूल जाने वाले बच्चे और बच्चियों को ही देख लीजिये। अभी नवरात्रि का त्योहार बीता है, अगर उसके आयोजनों में आप गये हो तो खुद महसूस करते होंगे। डाडिया महोत्सव के नाम पर तो अभी कार्यक्रम चल ही रहे हैं। स्कूलों में वार्षिकोत्सव आयोजन को देख लीजिये। कहीं पर भी ऐसे कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं जहां हम अपने देश की संस्कृति को जानने-समझने का अवसर प्राप्त कर सकें। संस्कार को मजबूत कर उसका संदेश समाज को दे सकें। 20 और 21 अक्टूबर 2013 को मेरे सामने दो घटनायें घटीं। जिससे मैं पूरी तरह से अवाक रह गया। पहली घटना 20 अक्टूबर को राजधानी लखनउ के मडियांव थाना क्षेत्र में हुई। यहां एक परिवार में पति और पत्नी मिलकर सहमति से सेक्स रैकेट का संचालन किया करते थे। यह धंधा भी अपने घर में ही चलाया करते थे। इस धंधे में नौकरी की तलाश में फंसने वाली भोली-भाली लडकियों को उतार दिया जाता था। जो लडकी विरोध करती थी, उसका उत्पीडन किया जाता था। पर एक दिन इस पाप का घडा भर गया। मुहल्ले की ही किसी महिला ने इस बात की शिकायत पुलिस से कर दी। पुलिस ने दबिश दी तो सात लडकियां और आठ ग्राहक मौके से पकडे गये। यह देख मैं पूरी तरह से अचम्भा रह गया। हे भगवान यह कैसी आधुनिकता है कि जहां घर में उस धंधे का संचालन किया जा रहा है, जिसे हमारे समाज में महापाप की श्रेणी में रखा गया है। दूसरी घटना 20वीं वाहिनी पीएसी के सेनानायक आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर के साथ घटी। श्रीमती नूतन ठाकुर आईपीएस अधिकारी की पत्नी होने के साथ ही शोसल एक्टिविस्ट और आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं। वह समाज से जुड महत्वपूर्ण मुददों पर आये दिन आवाज उठाती रहती हैं। 21 अक्टूबर को आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने आजमगढ कोतवाली में बीएसएनएल और एक अन्य मोबाइल कंपनी के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई। मामला यह है कि नूतन ठाकुर की मोबाइल पर 93780872199 नंबर से मिस्ड काल आयी। उन्होंने काल बैक किया तो दूसरी तरफ से एक पुरूष और महिला के बीच की अश्लील बात करने की आवाज सुनाई दी। इस पर उन्होंने फोन काट दिया, देखा तो उनकी मोबाइल को बैलेन्स 30 रूपये कट गया। दूसरी बार परीक्षण के तौर पर फिर काल किया तो फिर वही बात सुनाई दी और 15 रूपये का बैलेन्स कट गया। इस पर अमिताभ ठाकुर ने अपराध संख्या-375-2013 भादवि की धारा 419, 420, 292 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है। यह तो बात एक आईपीएस अधिकारी की पत्नी से जुडी है। आम आदमी के साथ ऐसा न जाने कितनी बार करके अश्लीलता फैलाने वाली मोबाइल कंपनी द्वारा लोगों का लूटा जा रहा है। मुझे याद है कुछ माह पहले बीएसएनएल कंपनी द्वारा विज्ञापन जारी करके यह जानकारी दी गयी थी कि 11 अंक वाले नंबर से मिस्ड काल आने वाली कालों पर कालबैक न करें। पर सवाल यह है कि आखिर वह कौन सी कंपनी है, जिस पर सरकार और उसके तंत्र का कोई जोर नहीं है कि ऐसे अवैधानिक कार्यों पर रोक लग सके। इन दोनों घटनाओं को जिक्र करने का मेरा मन्तव्य यह है कि समाज में अश्लीलता को आज के जमाने में प्रदर्शन का सबसे नायाब और अच्छा तरीका मान लिया गया है।
समाज कितना गिर जायेगा, इस बात की कल्पना नहीं की जा सकती। जिस भारत देश में कभी गांव की बहन-बेटी को अपनी बहन-बेटी मानकर लोग रस्मअदायगी किया करते थे, अब वहीं मिजाज पूरी तरह से बदल गया है। अगर इसका विरोध किया जाये तो लोग कहते हैं कि जमाना आधुनिक हो रहा है। जिधर देखिये उधर अश्लीलता का ही साम्राज्य फैलता नजर आ रहा है। टेलीविजन खोलिये तो अश्लीलता का संसार, रेडियो आन करिये तो उसमें भी वही बात। कपडे की दुकान पर जाइये, बाजार जाइये, सच कहूं आपको शरम आ जाएगी। और तो और आपके घर में आसपास का परिवेश भी उसी तरह से आधुनिक बन चुका है, जहां अश्लीलता फैलाना ही मुख्य फैशन समझा जा रहा है। अगर मेरी बात सच लगे तो स्कूल जाने वाले बच्चे और बच्चियों को ही देख लीजिये। अभी नवरात्रि का त्योहार बीता है, अगर उसके आयोजनों में आप गये हो तो खुद महसूस करते होंगे। डाडिया महोत्सव के नाम पर तो अभी कार्यक्रम चल ही रहे हैं। स्कूलों में वार्षिकोत्सव आयोजन को देख लीजिये। कहीं पर भी ऐसे कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं जहां हम अपने देश की संस्कृति को जानने-समझने का अवसर प्राप्त कर सकें। संस्कार को मजबूत कर उसका संदेश समाज को दे सकें। 20 और 21 अक्टूबर 2013 को मेरे सामने दो घटनायें घटीं। जिससे मैं पूरी तरह से अवाक रह गया। पहली घटना 20 अक्टूबर को राजधानी लखनउ के मडियांव थाना क्षेत्र में हुई। यहां एक परिवार में पति और पत्नी मिलकर सहमति से सेक्स रैकेट का संचालन किया करते थे। यह धंधा भी अपने घर में ही चलाया करते थे। इस धंधे में नौकरी की तलाश में फंसने वाली भोली-भाली लडकियों को उतार दिया जाता था। जो लडकी विरोध करती थी, उसका उत्पीडन किया जाता था। पर एक दिन इस पाप का घडा भर गया। मुहल्ले की ही किसी महिला ने इस बात की शिकायत पुलिस से कर दी। पुलिस ने दबिश दी तो सात लडकियां और आठ ग्राहक मौके से पकडे गये। यह देख मैं पूरी तरह से अचम्भा रह गया। हे भगवान यह कैसी आधुनिकता है कि जहां घर में उस धंधे का संचालन किया जा रहा है, जिसे हमारे समाज में महापाप की श्रेणी में रखा गया है। दूसरी घटना 20वीं वाहिनी पीएसी के सेनानायक आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर के साथ घटी। श्रीमती नूतन ठाकुर आईपीएस अधिकारी की पत्नी होने के साथ ही शोसल एक्टिविस्ट और आरटीआई एक्टिविस्ट भी हैं। वह समाज से जुड महत्वपूर्ण मुददों पर आये दिन आवाज उठाती रहती हैं। 21 अक्टूबर को आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने आजमगढ कोतवाली में बीएसएनएल और एक अन्य मोबाइल कंपनी के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई। मामला यह है कि नूतन ठाकुर की मोबाइल पर 93780872199 नंबर से मिस्ड काल आयी। उन्होंने काल बैक किया तो दूसरी तरफ से एक पुरूष और महिला के बीच की अश्लील बात करने की आवाज सुनाई दी। इस पर उन्होंने फोन काट दिया, देखा तो उनकी मोबाइल को बैलेन्स 30 रूपये कट गया। दूसरी बार परीक्षण के तौर पर फिर काल किया तो फिर वही बात सुनाई दी और 15 रूपये का बैलेन्स कट गया। इस पर अमिताभ ठाकुर ने अपराध संख्या-375-2013 भादवि की धारा 419, 420, 292 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है। यह तो बात एक आईपीएस अधिकारी की पत्नी से जुडी है। आम आदमी के साथ ऐसा न जाने कितनी बार करके अश्लीलता फैलाने वाली मोबाइल कंपनी द्वारा लोगों का लूटा जा रहा है। मुझे याद है कुछ माह पहले बीएसएनएल कंपनी द्वारा विज्ञापन जारी करके यह जानकारी दी गयी थी कि 11 अंक वाले नंबर से मिस्ड काल आने वाली कालों पर कालबैक न करें। पर सवाल यह है कि आखिर वह कौन सी कंपनी है, जिस पर सरकार और उसके तंत्र का कोई जोर नहीं है कि ऐसे अवैधानिक कार्यों पर रोक लग सके। इन दोनों घटनाओं को जिक्र करने का मेरा मन्तव्य यह है कि समाज में अश्लीलता को आज के जमाने में प्रदर्शन का सबसे नायाब और अच्छा तरीका मान लिया गया है।

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